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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
के प्रस्ताव को 2017 तक
साठ जिलों में लागू करने की योजना
नई दिल्ली (एसएनबी)। केंद्रीय
मंत्रिमंडल ने लाइलाज बन चुके इंसेफलाइटिस
(जापानी बुखार) की रोकथाम और नियंतण्रके लिए एक व्यापक
बहुस्तरीय रणनीति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। पांच साल की इस योजना पर 4038 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
पिछले 33 वर्षो
से हजारो बच्चों को लील चुके इस जापानी बुखार का इलाज दुनिया भर के डाक्टर नहीं कर पा
रहे हैं। अनेक अनुसंधान संस्थानों ने
कोशिश की लेकिन उनके हाथ भी निराशा लगी है। अब सरकार ने पांच
साल के लिए एक समग्र
योजना बनाई है संभव है इसका फायदा पूर्वी उत्तर प्रदेश के 60 जिलों को
मिल सके। जापानी दिमागी बुखार और एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम की रोकथाम और
नियंतण्रके लिए मंत्रिसमूह की सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य
और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रस्ताव को 2012-13
से 2016-17 तक पांच
साल की अवधि में प्राथमिकता के साथ 60
जिलों में लागू किया जाएगा। योजना को स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ
पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय, सामाजिक
न्याय और अधिकारिता मंत्रालय,
आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय तथा महिला
और बाल विकास मंत्रालय द्वारा पांच राज्यों असम,
बिहार, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में लागू किया जाएगा। इस
प्रस्ताव के तहत प्रमुख
गतिविधियों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सक्रि यता,
जापानी इंसेफलाइटिस
के टीकाकरण का विस्तार,
चिकित्सकीय और सामाजिक पुनर्वास, ग्रामीण तथा शहरी इलाकों
में पेयजल और स्वच्छता के प्रावधानों में सुधार तथा पोषण में सुधार शामिल
हैं। मंत्रिमंडल ने 12वीं
पंचवर्षीय योजना के दौरान उपलब्ध बजट में
से मंत्रालयों के लिए इन बीमारियों से निपटने के लिए आवंटन
को मंजूरी दी। इनमें
स्वास्थ्य मंत्रालय को 1131.49 करोड़
रुपए का आवंटन, पेयजल
और स्वच्छता
मंत्रालय को 2301.57 करोड़
रुपए और सामाजिक न्याय मंत्रालय को
9.19 करोड़ रुपए का आवंटन किया जाएगा। आवास
और शहरी गरीबी उन्मूलन तथा
महिला और बाल विकास मंत्रालय को मंत्रीसमूह की सिफारिशों के
अनुसार कैबिनेट की
मंजूरी के दो महीने के भीतर अतिरिक्त कोष दिया जाएगा। यह राशि करीब 600 करोड़ रुपए की
होगी।
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Rashtirya sahara National Edition 19-10-2012 Health PeJ-11
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