Thursday, October 4, 2012

आवश्यक दवाओं की मूल्य नीति न बदलें



मूल्य नीति में बदलाव से व्यक्त की जा रही है आवश्यक दवाओं के दाम बढ़ने की आशंका सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश
नई दिल्ली (एसएनबी)। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि आवश्यक दवाओं की मौजूदा मूल्य नीति में किसी प्रकार का परिवर्तन न किया जाए। मूल्य नीति में बदलाव से आवश्यक दवाओं के दाम बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार ने 13 जुलाई, 1999 को आवश्यक दवाओं के मूल्य निर्धारण के लिए अधिसूचना जारी की थी। इसमें बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने 348 जेनेरिक दवाओं को सरकारी नियंतण्रमें लाकर उनके दाम निर्धारित करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक सरकार इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दे। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख नौ अक्टूबर निर्धारित की है। बेंच ने स्पष्ट किया कि मूल्य निर्धारण एक अहम मुद्दा है और इस कारण अदालत हस्तक्षेप कर रही है। अदालतें सरकार नहीं चलातीं लेकिन जरूरत पड़ने पर ही दखल देती हैं। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि मंत्री समूह ने इस संबंध में निर्णय ले लिया है। मंत्री समूह की सिफारिशों को जल्द ही कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा था कि दवाओं के दाम पर अंकुश लगाने के लिए 348 जेनेरिक दवाओं को सरकारी मूल्य कंट्रोल के तहत लाया जाएगा। इन दवाओं को औषधि मूल्य नियंतण्रआदेश (डीपीसीओ) की सूची में शामिल किया जाएगा। डीपीसीओ के दायरे में अभी सिर्फ 74 दवाएं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह चार हफ्ते के अंदर सभी औपचारिकताएं पूरी कर ले। दवाओं की लागत और उनके फुटकर मूल्य में भारी अंतर होने के कारण उपभोक्ताओं को दवाओं का बहुत अधिक दाम चुकाना पड़ता है। जेनेरिक दवाओं को बहुराष्ट्रीय कंपनियां विभिन्न ब्रांड नाम से ऊंचे दामों पर बाजार में बेचती हैं जबकि वास्तव में उनका मूल्य काफी कम होता है। सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। दवाओं के मूल्यों में अनावश्यक वृद्धि पर अदालत चिंता प्रकट कर (शेष पेज 2)

Rashtirya sahara National Edition 4-10-2012 Health Pej -1

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