Monday, October 8, 2012

मल्टीविटामिन बढ़ा सकते हैं हमारी याददाश्त




लंदन, प्रेट्र : मल्टीविटामिन गोली के रोजाना इस्तेमाल से आपकी याददाश्त में इजाफा हो सकता है। इन गोलियों का सेवन गिरती हुई दिमाग की क्षमता को संभाल सकता है। ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को पता चला कि मल्टीविटामिन याद करने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। साथ ही दिमाग की कोशिकाओं में भी इजाफा करते हैं। शरीर को 13 तरह के विटामिन की जरूरत होती है। ए, सी, डी और के के अलावा और आठ तरह के विटामिन बी की जरूरत पड़ती है। इन सभी का शरीर में अलग-अलग इस्तेमाल होता है। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, शोध के लिए 3,200 पुरुष एवं महिलाओं का इस्तेमाल किया गया। शोध के दौरान जिस ग्रुप को मल्टी विटामिन दिए गए उन्हें पुरानी चीजें और जानकारियां याद रखने में आसानी हुई। ऐसा ही एक दूसरा शोध ऑस्ट्रेलिया की ही स्विनबर्न यूनिवर्सिटी में हुआ। इसमें 64 वर्ष से ज्यादा उम्र की उन महिलाओं को शामिल किया गया जिन्होंने याददाश्त कमजोर की शिकायत की थी। यहां भी मल्टीविटामिन से फर्क पड़ता दिखाई दिया। शुक्राणुओं की गति धीमी कर पुरुषों के लिए बनी गर्भनिरोधक गोली मेलबर्न : शुक्राणुओं की गति धीमी कर पुरुषों के लिए नई गर्भनिरोधक गोली का ईजाद किया जा सकता है। सिडनी मॉर्निग हेराल्ड के मुताबिक, मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा रास्ता निकाला है जो शुक्राणुओं की गति को तेज करने वाली प्रणाली को धीमा कर देती है। इस शोध से पुरुषों में बांझपन को भी समझने में मदद मिलेगी। शोधकर्ताओं ने आरएबीएल-2 नाम के एक जीन की खोज की, जो शुक्राणुओं को गति देने का ईधन है। मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर ओ ब्रायन ने बताया कि हमारे सामने मुख्य चुनौती यह है कि पुरुषों के लिए ऐसी गर्भनिरोधक गोली बनाई जाए जो केवल कुछ समय के लिए शुक्राणुओं की गति धीमा करे। बेवजह डर से बचाता है ट्रॉमा स्विच लंदन : वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क में ट्रॉमा स्विच का पता लगाया है, जो बेवजह और अनियंत्रित डर से बचाता है। मस्तिष्क में बदलती परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की असाधारण क्षमता होती है, जो हमें तनाव और सदमे के कारण होने वाली मानसिक परेशानी से बचाती है। मॉनीक्यूलर साइकायट्री नामक जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, तनावपूर्ण घटनाएं मस्तिष्क के भावात्मक केंद्र में मौजूद कुछ रिसेप्टर्स को पुनर्निर्देश देती हैं। इसके बाद मस्तिष्क के भावनात्मक केंद्र ये निर्णय लेते हैं कि सदमे की किसी अगली घटना पर किस तरह प्रतिक्रिया होगी। ये रिसेप्टर्स पीएआर1 कहलाते हैं और मस्तिष्क कोशिकाओं के लिए नियंत्रण केंद्र की तरह काम करते हैं। ये उन्हें बताते हैं कि वे कब अपनी गतिविधियां बंद करें अथवा कब इन्हें तेज करें। यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर रॉबर्ट पावलक ने कहा कि खोज से मालूम होता है कि समान रिसेप्टर्स पूर्व के सदमे तथा तनाव के आधार पर मस्तिष्क कोशिकाओं को जागृत अथवा सुसुप्त रख सकते हैं। शोध से यह भी जाहिर होता है कि मस्तिष्क किस तरह काम करता है और कैसे भावनाएं निर्मित होती हैं।
Dainik Jagran National Edition 8-10-2012  Health   , Pej -14

No comments:

Post a Comment