हर साल दो हजार बच्चे मर जाते हैं कलावती सरन अस्पताल में
नीरजमिश्रनई दिल्ली। बच्चों के इलाज के लिए देशभर में
मशहूर कलावती सरनअस्पताल में हर साल औसतन दो हजार बच्चों की मौत हो जाती है। पांच वर्ष केदौरान 10 हजार 81 बच्चों की इस अस्पताल में जान गइ र्है। केंद्र सरकार
केइस
अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं का आलम यह है कि बच्चों के आईसीयू में 10 वेंटिलेटर लगे हैं, इनमें से चार खराब हैं और एक पूरी तरह कंडम हो चुका हैयानि 10 में से पांच वेंटीलेटर ही चालू हालत में हैं।
इन तथ्यों का खुलासासूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ। इस गंभीर मामले को लेकरमानवाधिकार आयोग में याचिका
दायर की जा चुकी है। मानवाधिकार कार्यकर्ताआरएच बंसल ने अस्पताल प्रशासन से आरटीआई के
जरिए कुछ जानकारियां मांगी थीं।प्रशासन की ओर से जो सूचनाएं दी गई वे किसी को भी
चौंकाने के लिए पर्याप्तहैं। आरटीआई के जवाब में अस्पताल प्रशासन ने अगस्त तक
की जानकारी उपलब्धकराई है, जिसमें बताया
गया कि कलावती सरन अस्पातल में पांच वर्ष में 10081 शिशुओं की मौत हुई। वर्ष 2008 में 2713, वर्ष 2009 में 2499,
वर्ष 2010 में 2144, वर्ष 2011 में 1782
शिशुओं की मौत हुई। वर्ष 2012 में आंकड़ा तैयारकरते समय तक 943 शिशुओं की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन की ओर से बताया
गयाकि इन
शिशुओं की मौत वेंटिलेटर की कमी के चलते नहीं हुई। एक अन्य प्रश्न केजबाव में बताया गया कि
पीडियाट्रिक्स इंटेशिव केयर यूनिट में 10 वेंटिलेटरलगे हैं जिसमें चार चालू स्थिति में हैं जबकि पांच की मरम्मत हो रही है।एक ठीक होने की स्थिति
में नहीं है। वाडरे में बीमार शिशुओं को वेंटिलेटरकी जरूरत पड़ने पर आईसीयू या एनआईसीयू में
शिफ्ट कर दिया जाता है। दूसरेवाडरे के शिशुओं को आईसीयू के वेंटिलेटर में शिफ्ट
करने पर स्वभाविक है किइसमें दबाव बढ़ेगा जिससे चिकित्सा सुविधा की गुणवत्ता
में कमी आएगी। जबआईसीयू में यह हाल है तो अन्य वाडरे का क्या होगा इसका अंदाजा इसी से
लगायाजा
सकता है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार अस्पताल में अलग-अलग वाडरे में 25 वेंटिलेटर लगे हैं जिसमें नौ खराब हैं जिन्हें
दुरुस्त करने की प्रक्रियाजारी है। अस्पताल की ओर से यह भी बताया गया कि खराब
वेंटिलेटरों का आंकड़ास्थिर नहीं रहता है। खराब होने की स्थिति में टेलीफोन
से सर्विस एजेंसी कोसूचना दी जाती है जिसके बाद इसे दुरुस्त किया जाता है। मानवाधिकारकार्यकर्ता आरएच बंसल
के अनुसार कलावती सरन दिल्ली का एकमात्र शिशुओं काअस्पताल है। जिस दर से प्रतिवर्ष शिशुओं की
मौत हो रही है यह एक गंभीरमामला है। इसके खिलाफ विभाग शीघ्र कदम उठाए। खराब पड़े
चिकित्सकीय उपकरणोंको ठीक कर बेहतरीन सुविधा उपलब्ध कराई जाए इसके लिए हाईकोर्ट में अर्जीदायर करेंगे। इस मामले
को लेकर मानव अधिकार आयोग में याचिका दायर कर दी गईहै। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए
संज्ञान लिया है। उन्होंनेकहा कि यह घोर लापरवाही का मामला है। इस मामले में जब
अस्पताल प्रशासन सेबात करने की कोशिश की गई तो वहां के निदेशक (प्रशासन) अतुल मुरारी ने कहाकि इस मामले की जानकारी
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाचुकी है। अस्पताल में पांच वर्ष के दौरान 10
हजार 81 बच्चों की जाचुकी है जानसुविधाओं का है टोटा, 10 में से पांच वेंटिलेटर नहीं करते काममामले को लेकर
मानवाधिकार आयोग में याचिका डाली
Rashtirya sahara National Edition 20-10-2012 Pej-3 Health
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