लंदन, आइएएनएस
: यदि
आप अपने दिल को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो हर रोज तरबूज जरूर खाएं। एक नए
अध्ययन में पाया गया है कि तरबूज आपके शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल नहीं
बनने देता और वजन कम करने में भी मदद करता है। डेली
मेल के मुताबिक अध्ययनकर्ताओं ने वसा की अधिक मात्रा लेने वाले चूहों पर
यह अध्ययन किया। उन्होंने अपने अध्ययन में पाया कि तरबूज देने से चूहों में
खराब लिपोप्रीटन (एलडीएल) की मात्रा कम हो गई। एलडीएल एक प्रकार का कोलेस्ट्रॉल
है जो धमनियों को जाम कर दिल के रोगों को बढ़ावा देता है। अमेरिका
के परडयू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने देखा कि नियमित रूप से तरबूज
खाने से वजन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और इसके परिणामस्वरूप
रक्त वाहिनियों में वसा युक्त पदार्थ कम इकट्ठे होते हैं। उनका
मानना है कि तरबूज के जूस में पाए जाने वाले एक रसायन सिट्रुलिन में ये
स्वास्थ्यवर्धक गुण पाए जाते हैं। वैसे इस नए शोध में तरबूज खाने का रक्तचाप
पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं देखा गया लेकिन दिल से संबंधित अन्य खतरों
पर इसका शक्तिशाली असर देखा गया। ब्रिटेन में हर साल 270,000 लोग दिल
के दौरे की चपेट में आते हैं और तीन में से एक की मौत तो अस्पताल पहुंचने
से पहले ही हो जाती है। मृत कोशिकाओं से छुटकारा दिलाते हैं
एंजाइम सिडनी
: खून के थक्के को समाप्त करने वाला एंजाइम किसी बीमारी या मानसिक आघात
की वजह से समय से पूर्व नष्ट हुई कोशिकाओं से छुटकारा दिलाने का काम भी
करता है। यह जानकारी एक शोध से सामने आई है। मोनाश यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों
ने यह प्रमाणित किया है कि कैसे टी-पीए एंजाइम दोनों ही क्रियाओं
में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विश्वविद्यालय के ऑस्ट्रेलियन सेंटर
फार ब्लड डिजीज के प्रोफेसर रॉबर्ट मेडकाफ और एंड्रे सैमसन ने मोनाश के
जीव-रसायन और मॉलीक्युलर बायोलॉजी के प्रोफेसर स्टीफन बॉटोमली के साथ मिलकर
यह शोध किया। विश्वविद्यालय से जारी वक्तव्य के मुताबिक शोधकर्ताओं ने
पाया कि मृत कोशिकाएं शरीर से बाहर निकलने के लिए पुनर्सरचना की प्रक्रिया
से गुजरकर खून के थक्के जैसी संरचना बनाती हैं। इस प्रक्रिया की व्याख्या
इससे पहले कभी नहीं की गई है। यह नई खोज उस वक्त सामने आई जब शोधकर्ता
मस्तिष्क के ऊतकों का अध्ययन कर रहे थे। सब पर नहीं चलता
सम्मोहन वाशिंगटन
: सम्मोहन निश्चित तौर पर एक कला है लेकिन इसका जादू सब पर नहीं चल
सकता। वैज्ञानिकों का मानना है कि लोगों के मस्तिष्क के बनावट का आकार अलग-अलग
होता है। सम्मोहन
को एक ऐसी स्थिति के रूप में जाना जाता है, जिसके दौरान एक
व्यक्ति का
ध्यान और एकाग्रता चरम पर होते हैं। इसका मुख्य तौर पर उपयोग मरीजों को दर्द, अवसाद
पर नियंत्रण, चिंता
और अलग-अलग चीजों से होने वाले भय से निजात दिलाने के लिए
किया जाता है।
Dainik jagran National Edition 6-10-2012 Health Pej -14
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