Monday, April 11, 2011

दिल्ली में 107 वर्षीय महिला का कूल्हा बदला


 दिल्ली में 107 वर्षीय महिला कूल्हे को आंशिक रूप से बदलने की शल्य क्रिया से गुजरने वाली संभवत: विश्व की सबसे उम्रदराज मरीज बन गई हैं और उन्हें उम्मीद है कि एक पखवाड़े के भीतर वह दोबारा चल-फिर सकेंगी। इससे पहले ब्रितानी नागरिक लिली वॉटर्स का नाम गिनीज व‌र्ल्ड रिकॉर्ड्स में ऐसी सबसे उम्रदराज महिला के रूप में दर्ज था, जिनका वर्ष 2007 में एक कूल्हा पूरा बदला गया था। तब उनकी उम्र 101 वर्ष और 196 दिन थी। दिल्ली के बंगाली मार्केट की निवासी विद्यावती चोपड़ा की तीन दिन पहले कूल्हे को आंशिक रूप से बदलने की शल्यक्रिया हुई। और वह अब इस प्रक्रिया से गुजरने वाली संभवत: विश्व की सबसे उम्रदराज मरीज बन गई हैं। विद्यावती उन चंद खुशकिस्मत लोगों में से एक हैं जिन्होंने जेल में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखबीर और राजगुरु को देखा था। विद्यावती का पिछले सप्ताह कूल्हा टूट गया। उनकी उम्र के मद्देनजर परिजन शल्यक्रिया कराने के विकल्प को लेकर चिंतित थे। हालांकि वह शल्यक्रिया के लिए तैयार थीं। इसी से प्राइमस ऑर्थो और स्पाइन अस्पताल के सलाहकार हड्डी शल्यक्रिया विशेषज्ञ डॉ. एम के. मैगेजिन को मदद मिली, जिन्होंने महिला के परिवार को इसके लिए राजी किया। 25 वर्षो से चोपड़ा परिवार का इलाज कर रहे चिकित्सक ने बताया कि शल्यक्रिया के दौरान महिला ने उन्हें पहचान लिया और कहा कि वह जल्द से जल्द अपने पैरों पर चलना चाहती हैं। उन्होंने कहा, अस्सी से 90 की उम्र के लोगों में कूल्हे को आंशिक रूप से बदलवाने की प्रक्रिया आम है। मैंने 104 वर्षीय मरीज की भी इस तरह की शल्यक्रिया की है। इस आयु समूह में कूल्हे की हड्डी का टूटना आम बात होती है। असल में विद्यावती की इच्छाशक्ति के बूते उनकी शल्यक्रिया हो पाई। डॉक्टर मैगेजिन चोपड़ा परिवार का इलाज पिछले 25 सालों से कर रहे हैं। वह इस परिवार की चार पीढि़यों का इलाज करते रहे हैं। उनका कहना है कि एक पखवाड़े में ही विद्यावती अपने पैरों पर खड़ी हो जाएंगीं। उनका कहना है कि विद्यावती चूंकि कम सुनती हैं और उनके पैरों पर अभी जोर नहीं डाला जा सकता इसलिए उनके पूर्ण स्वस्थ होने के बावजूद उन्हें एक हफ्ते बाद ही वॉकर पर चलाया जाएगा। विद्यावती की 67 वर्षीय बहू श्रेष्ठ लता चोपड़ा के मुताबिक उनकी सास का बचपन पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बीता है। उनकी शादी पंजाब के नवांशहर में हुई। उसके बाद 1940 में उनका पूरा परिवार दिल्ली में बस गया। विद्यावती के पति दिल्ली में एक ब्रिटिश कंपनी में मैनेजर थे|

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