दुनिया के किसी सभ्य समाज या देश में खाने-पीने की चीजों में ऐसी मिलावट नहीं होती जो हमारे देश में होती है। मुझे याद है कि कुछ महीने पहले अमेरिका में एक खास किस्म की चॉकलेट में कोई ऐसा पदार्थ मिलाया गया था जिससे रिएक्शन होने लगा था। इस चॉकलेट के निर्माता ने अमेरिका के बाजार में जहां कहीं भी यह चॉकलेट सैल्फों में पड़ी थी वहां से वापस मंगाकर उन्हें समुद्र में डाल दिया और अगले लॉट में उसका सुधार किया पर हमारे देश में तो खाने-पीने की चीजों में, दवाइयों में, खून में सभी तरह की चीजों में मिलावट से परहेज नहीं। ताजा उदाहरण कुट्टू के आटे का है। पूर्वी जिले के कल्याणपुरी में कुट्टू का आटा कुछ लोगों के लिए भारी साबित हुआ। व्रत के दौरान जब कुछ लोगों ने इस आटे से बने व्यंजनों का सेवन किया तो उन्हें फूड पायजनिंग हो गई। उन्हें जी मचलाना, उल्टी और दस्त की शिकायतें होने लगीं। पूरे इलाके में हड़कम्प मच गया। आटे से बीमार होने वालों की संख्या 250 से अधिक हो गई है। नवरात्रि के पहले दिन सोमवार को ही यह दर्दनाक वाक्या हुआ।
मिलावटखोरों के खिलाफ लचर कानूनी प्रावधानों व सरकारी अधिकारियों तथा अकूत धन कमाने के लालची मिलावटखोरों के बीच मिलीभगत के कारण देश में खाने-पीने की वस्तुओं में जबरदस्त मिलावट कर आम जनता की जान से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। राजधानी में दूध, मसाले, दालें, पनीर, खोआ सहित ब्रांडेड कम्पनियों के पानी तक में मिलावट व उनकी नकल किए जाने के मामले सामने आए हैं। आम लोगों की बात जाने दें, खुद दिल्ली सरकार भी स्वीकार कर रही है कि खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट की जा रही है। बताने की जरूरत नहीं है कि इन मिलावटी खान-पान की चीजों से लोग गम्भीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
दिल्ली सरकार के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2009-10 में खाद्य अपमिश्रण निरोधक शाखा न मिलावट की जांच के लिए विभिन्न खाद्य पदार्थों के 300 हजार नमूने उठाए थे। 133 नमूनों में मिलावट पाई गई। 22 मामले ऐसे भी पाए जिनमें नामचीन ब्रांडों के नाम से जाली सामानों की बिक्री की जा रही थी। इसी प्रकार वर्ष 2010-2011 में जांच के लिए उठाए गए 3510 नमूनों में से 111 मामलों में मिलावट पाई गई। 11 मामले जाली ब्रांड के भी सामने आए। 100 मामलों में जिम्मेदार लोगों को सजा भी दी गई है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वर्ष 2010 में पीने के पानी के छह संयंत्र सरकार की अनुमति के बगैर चल रहे थे। इसके 95 नमूने लिए गए जिनमें से आठ मिलावटी पाए गए और तीन जाली ब्रांड मिले। वर्ष 2010 में खाद्य अपमिश्रण निरोधक शाखा ने दूध के 63 नमूने उठाए जिनमें 14 में मिलावट पाई गई। दुग्ध उत्पादों के 482 नमूने लिए गए, 32 में मिलावट पाई गई। दिल्ली विधानसभा में मिलावटी खाद्य पदार्थों के यह मामले कई बार उठाए गए हैं। विपक्ष लगातार यह आरोप लगता रहा है कि हरी सब्जियां रंग कर बेची जाती हैं। सरकार पर विपक्ष का आरोप यह भी रहा है कि खाद्य अपमिश्रण निरोधक शाखा के अधिकारियों की मिलावटखोरों से साठगांठ है और इसी वजह से यह गोरखधंधा फल-फूल रहा है। नमूने उठाने के मामले में भी दुकानदारों से मोल-भाव किया जाता है। रिश्वतखोरी की वजह से मिलावट के बाजार में रौनक छाई हुई है और मिलावटखोरों को किसी प्रकार का डर नहीं है।
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