लिसेस्टर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अंतरराष्ट्रीय दल ने ऐसा इंजेक्शन बनाया है जो दिल के दौरे और मस्तिष्काघात के 12 घंटे के भीतर दिए जाने पर इनसे हुई क्षति को नियंत्रित करेगा। माना जा रहा है कि यह इंजेक्शन फिलहाल इन बीमारियों से होने वाले नुकसान को आधा कर देगा। प्रोसीडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की पत्रिका में यह जानकारी प्रकाशित की गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इंजेक्शन हृदय रोग के इलाज में क्रांति ला देगा। इससे प्रत्यारोपण सर्जरी में भी सहायता मिलेगी। शोधकर्ताओं के मुताबिक, हमने सबसे पहले एमएएसपी-2 नाम के एंजाइम को पहचाना, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का घटक है। इसमें बदलाव इस्केमिया (रक्त प्रवाह और उसमें ऑक्सीजन की कमी) जैसी बीमारी को बढ़ाता है, जो हार्ट अटैक के कारण जान जाने की मुख्य वजह है। दल ने इस एंजाइम को बे-असर करने के लिए एंटीबॉडी इंजेक्शन तैयार करने में सफलता हासिल की है। इस इंजेक्शन का असर जानवरों में पूरी तरह कामयाब रहा है। मुख्य शोधकर्ता विलहेल्म श्वाएबल ने कहा, यह सफलता इस्केमिया और उसके कारण हार्ट अटैक और मस्तिष्काघात के इलाज में नई उपलब्धि साबित हो सकती है। इस नई पद्धति का इस्तेमाल उन जगहों पर भी किया जा सकता है जहां रक्त प्रवाह के अस्थाई अवरोध के कारण खतरा रहता है। शुरू होते ही पता चलेगी टीबी लंदन, एजेंसी : डॉक्टरों ने तपेदिक (टीबी) की जांच की एक नई तकनीक विकसित की है जिससे इस बीमारी के शुरुआत में ही इसकी पहचान की जा सकेगी। भारत, दक्षिण अफ्रीका, पेरू, अजरबैजान, फिलिपींस और युगांडा जैसे तपेदिक प्रभावित देशों के छह हजार 648 लोगों पर किए गए एक्सपर्ट एमटीबी :आरआइएफ नाम की इस जांच के बाद पता चला है कि इससे बीमारी के शुरुआती चरण में ही इसका पता लगाया जा सकता है। अमेरिका के सेफीड इंक और स्विटजरलैंड के फाउंडेशन फॉर इनोवेटिव निउ डाएगनॉस्टिक्स (फाइन्ड) द्वारा विकसित इस नई जांच तकनीक संबंधी रिपोर्ट को दी लैंसेट जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
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