अल्जाइमर (दिमागी बीमारी) को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया टीका ईजाद करने का दावा किया है। यह सिर्फ इस बीमारी को रोकने का काम ही नहीं करेगा बल्कि इसके दोबारा हमले से भी बचाए रखेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि दो साल के भीतर यह बाजार में उपलब्ध होगा। नए टीके पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने हालांकि यह भी कहा है कि बचाव का यह तरीका सौ फीसदी सक्षम नहीं है, मगर अल्जाइमर के इलाज में अब तक की सबसे बड़ी सफलता है। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, इसके मात्र दो टीकों में से एक परीक्षण के अंतिम चरण यानी तीसरे चरण तक पहुंच चुका है। अकेले ब्रिटेन में अल्जाइमर और डिमेंशिया की अन्य किस्मों से करीब आठ लाख लोग प्रभावित हैं। आबादी बढ़ने के साथ यह संख्या दोगुना होने की उम्मीद जताई गई है। मौजूदा दवाएं अल्जाइमर की प्रगति को धीमी कर सकती हैं मगर इससे जूझने में असफल रहती हैं। इसका मतलब यह है कि इसका प्रभाव तेजी से चढ़ता है और जल्द ही यह बीमारी खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है। इसके विपरीत, बापिन्यूजूमैब इंजेक्शन, जिसका दुनियाभर के 10,000 से भी ज्यादा लोगों पर परीक्षण किया जा चुका है, इसे रोकने और यहां तक की एमिलॉयड (मस्तिष्क में अल्जाइमर पनपने में मदद करने वाला विषैला प्रोटीन) को फिर से बनने से रोकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह बीमारी की प्रगति को बेहद तेजी से धीमा कर देता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि अल्जाइमर की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान करने वाले परीक्षण इंजेक्शन देने का पहला संभावित मौका मुहैया करा सकते हैं। इससे लाखों लोग इस अकाट्य बीमारी के प्रभाव में आने से बच सकेंगे। गौरतलब है कि इस बीमारी के कारण व्यक्ति चलने, बोलने और यहां तक की चबाने तक में असमर्थ हो जाता है और उसे पूरी तरह दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। साउथहैंपटन यूनिवर्सिटी के मेमोरी असेसमेंट एंड रिसर्च सेंटर के डॉ. डेविड विलकिंसन ने कहा कि उम्मीद है कि यह टीका अल्जाइमर के इलाज में बड़ा बदलाव ला देगा। अगर हम इसे मस्तिष्क में ज्यादा क्षति होने से पहले ही दे सकें तो यह बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। 1990 के दशक में अल्जाइमर के टीके पर किए गए कुछ प्रारंभिक शोधों में शामिल रहे डॉ. विलकिंसन ने कहा कि अगर मस्तिष्क में एमिलॉयड के पैच स्पष्ट हो जाएं और हम टीके को बीमारी के शुरुआती अवस्था में ही दे दें तो यह क्षति होने से काफी हद तक बचा सकता है। टीके के जरिए इलाज से बीमारी में होने वाला खर्च भी बहुत कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ब्रिटेन में अल्जाइमर पर हर साल खर्च होने वाले 17 अरब पौंड (करीब 1250 खरब रुपये) का आधा हिस्सा बचाया जा सकता है। इस टीके पर काम कर रहीं तीन दवा कंपनियां अगले साल के अंत तक परीक्षण खत्म होने के बाद इसके बाजार में आने की उम्मीद कर रही हैं। ब्रिटेन और यूरोप के दवा लाइसेंस प्राधिकरणों से इस पर आगे बढ़ने की स्वीकृति मिलने के बाद ही टीके के दाम तय किए जाएंगे।
No comments:
Post a Comment