क्या आप अवसाद से ग्रस्त हैं! आपको तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए क्योंकि यह आपकी हड्डियों को भी कमजोर कर रहा है। एक नए अध्ययन में खुलासा किया गया है कि चिंता या तनाव और बोन मिनरल डेन्सिटी के बीच संबंध होता है। बोन डेन्सिटी को चिकित्सा जगत में ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रेक्चर के खतरे के परोक्ष संकेत से जोड़ा जाता है। नार्वे यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने 8,000 से ज्यादा पुरुषों और महिलाओं के आंकड़े एकत्रित कर उनका विश्लेषण किया। सभी प्रतिभागियों के कुहनी से अंगुलियों तक की बोन मिनरल डेन्सिटी की जांच की गई। साथ ही उन्होंने अवसाद और चिंता के लक्षणों से संबंधित एक प्रश्नावली को भी पूरा किया। अन्य कारक जो मनोरोग संबंधी लक्षणों और हड्डियों से संबंधित हो सकते थे, जैसे शरीर का भार और ऊंचाई, साथ ही साथ शारीरिक गतिविधियां, धूम्रपान, मदिरा सेवन, कैल्शियम-कैफीन का सेवन और वर्तमान मेडिकल स्थिति की भी अध्ययन के दौरान जांच की गई। शोध दल के सदस्य डॉ. लाना विलियम्स ने कहा कि उन्होंने पाया कि पुरुषों में अवसाद के लक्षण, साथ ही साथ चिंता के लक्षण बोन मिनरल डेन्सिटी की कमी से संबंधित थे। यहां तक की जब मेडिकल और जीवनचर्या के कारकों के हिसाब से देखा गया तो भी परिणामों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसे कई खतरे के कारण हैं जिनसे बोन मिनरल डेन्सिटी में कमी हो सकती है जैसे, ज्यादा उम्र, लिंग (महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले खतरा ज्यादा होता है), पारिवारिक प्रवृत्ति, सेक्स हार्मोन का कम स्तर, कैल्शियम का अपर्याप्त सेवन, विटामिन डी की कमी आदि। डॉ. विलियम ने कहा कि खराब मानसिक स्वास्थ्य भी इनमें से एक कारक हो सकता है। मौजूदा समय में मनोवैज्ञानिक बीमारी, खासतौर पर अवसाद और ऑस्टियोपोरोसिस के बीच संभावित संबंध विकासशील शरीर के शोध का विषय है। हालांकि यह पहला अध्ययन है जिसमें चिंता के लक्षणों का संबंध बोन मिनरल डेन्सिटी के साथ जांचा गया है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ एफेक्टिव डिस्ऑर्डर के ताजे अंक में प्रकाशित हुआ है।
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