आंखों की रोशनी जाने का सबसे बड़ा कारण उम्र के साथ होने वाला क्षय है और इससे पीड़ित लोगों को नए अनुसंधान से कुछ ही वर्षो के भीतर मदद मिलेगी
लंदन। आंखों के महत्वपूर्ण अवयव रेटिना को प्रयोगशाला में बना पाने में वैज्ञानिकों ने पहली बार सफलता पाई है।' स्टेम कोशिकाओं की मदद से मिली इस कामयाबी से लाखों नेत्रहीन लोगों में आशा का संचार होगा। डेली मेल के मुताबिक, जापान के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में मिली इस सफलता के बारे में कहा कि आंखों की रोशनी जाने का सबसे बड़ा कारण उम्र के साथ होने वाला क्षय है और इससे पीड़ित लोगों को नए अनुसंधान से कुछ ही वर्षो के भीतर मदद मिलेगी। कोब के रिकेन सेंटर फॉर डेवलपमेंटल बायोलॉजी के वैज्ञानिकों ने चूहों पर प्रयोग किए और 'खाली' अपरिपक्व स्टेम कोशिकाओं का उपयोग किया जो शरीर के किसी भी कोशिका में तब्दील हो सकता है। उन्होंने उन कोशिकाओं में प्रोटीन और रसायनों का मिशण्रतैयार कर आंखों के हिस्से तैयार किए। 'नेचर' जर्नल में इस बारे में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि अभी रेटिना पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है और पैदा होने वाले शिशु के जन्म से पहले वाली अवस्था में है, लेकिन यह आश्र्चयजनक उपलब्धि है। इस बारे में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में प्रोफेसर और नेत्र विशेषज्ञ रोबिन अली का कहना है, 'इस खूबसूरत संरचना (रेटिना) को डिश में देखना कुछ इस तरह है जैसे इसे किसी जंतु से अभी-अभी बाहर निकाला हो।'
प्रोफेसर का विश्वास है कि पांच साल की भीतर लोगों में इसका परीक्षण शुरू हो जाएगा। इसके बाद 10-15 वर्षो में सिंथेटिक रेटिना कोशिकाओं का इस्तेमाल दृष्टिहीनों की रोशनी लौटाने में किया जाने लगेगा।
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