मौसम का तेजी से बदलता मूड सेहत खराब कर सकता है। हर रोज तापमान में आ रहे उतार-चढ़ाव के चलते इन दिनों कॉमन कोल्ड, ब्रॉकाइटिस, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश, फेफड़ों और सिर में जकड़न, अस्थमाटिक अटैक जैसी दिक्कतें बढ़ गई हैं। सबसे ज्यादा परेशानी अस्थमा, डायबीटीज, हाई बीपी, कैंसर अथवा दिल के मरीजों को हो रही है। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. आरएन कालरा कहते हैं कि सर्दियों के बाद मौसम में उतार-चढ़ाव से नसों में सिकुड़न आ जाती है, जिससे ब्लड का सकरुलेशन कम हो जाता है और पर्याप्त मात्र में आक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण हार्ट को ज्यादा महेनत करनी पड़ती है। ऐसे में अगर तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव आता है तो दिक्कतें बढ़ जाती हैं। गर्मी में हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या में भी 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाती है। कैंसर हीलर सेंटर की एक्सपर्ट डा. दीपिका कहती हैं कि इम्यून सिस्टम कमजोर होने की वजह से मौसमी उतार-चढ़ाव कैंसर के मरीजों को बहुत जल्दी प्रभावित करता है और दूसरे इन्फेक्शन की चपेट में आने से उनकी हालत और अधिक खराब हो जाती है। इसमें कॉमन फ्लू, धूल भरी अधंड़ से ब्रोंकाइटिस के रोगियों की दिक्कतें ज्याद बढ़ जाती हैं। मूलचंद मेडिसिटी मधुमेह एवं पांव रोग विशेषज्ञ डा. अशोक दमीर कहते हैं कि समस्या से बचाव के लिए डायबिटिक और 60 से ऊपर की उम्र के लोग लिपिड प्रोफाइल (कॉलेस्ट्रॉल टेस्ट) जरूर कराएं। धूप निकलने के बाद ही घर से बाहर निकलें। अगर टहलते समय घबराहट महसूस होती है तो रुक जाएं। धूल मिट्टी से बचना चाहिए। ब्लड प्रेशर व डायबिटिक की दवाएं लेते रहना चाहिए। धूप व धूल से बचाव जरूरी है। अर्मिटिस अस्पताल के कार्डियॉलोजिस्ट डा. अनिल ढल ने सीने में दर्द होने की शिकायत को नजरंदाज न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तापमान में परिवर्तन से फेफड़ों पर दबाव बढ़ जाता है। दिल के रोगी के शरीर में रक्त की आपूर्ति स्लो हो जाती है। पेट दर्द, दस्त आने, पीलिया से बचाव के लिए हाइजीन सुनिश्चित करें। खांसी, जुकाम, बुखार होने पर डॉक्टर को दिखाएं। सिर पर जरूरी हो तो दिन में धूप से बचाव के लिए टोपी पहनें। पानी उबाल कर पिएं। ताजा खाना, सब्जियों के फल आदि का सेवन करें। व्यायाम करें व पौष्टिक आहार का सेवन करें। खुद दवा न खाएं। नकली डॉक्टर, नीम हकीम से दवाएं नहीं लें। खुले में बिकने वाला पानी न पिएं । कटे फल न खाएं।
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