Sunday, January 16, 2011

कंडम एंबुलेंस: दम तोड़ देते हैं 30 फीसदी मरीज

मरीज की एंबुलेंस से अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। ये चंद लाइनें आए दिन अखबारों और चैनलों की सुर्खियां बनती हैं, लेकिन इन मौतों के पीछे की हकीकत बेहद खौफनाक है। दरअसल, आईसीयू में आने वाले 30 फीसदी मरीज की मौत का कारण ये एंबुलेंस ही होती हैं, जो कि अधूरे चिकित्सकीय उपकरण से लैस होती हैं। तमाम में तो आक्सीजन सिलेंडर व अन्य उपकरण होते ही नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरी जानकारी के बाद भी आंखें मूंदे है। विभाग के मानकों के अनुसार, हर सामान्य एंबुलेंस में एक ऑक्सीजन सिलेंडर, इमरजेंसी मेडिसिन किट और स्ट्रेचर होना चाहिए, लेकिन अधिकांश में लीकेज और खाली ऑक्सीजन सिलेंडर इस्तेमाल हो रहे हैं। इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर एसोसिएशन के अनुसार, ऐसी एंबुलेंस में ऑक्सीजन पाइप भी जगह-जगह से कटा रहता है। कई में ड्राइवर सीट के नीचे एक स्विच होता है, जिससे ऑक्सीजन बचाने को बीच-बीच में सिलेंडर सप्लाई ऑफ कर दी जाती है। मरीज को मास्क तो लगाया जाता है, पर ऑक्सीजन नहीं मिलती। कई बार आधे भरे सिलेंडरों से ऑक्सीजन बीच रास्ते में ही निपट जाती है। सोसायटी के सदस्य डॉ. रनवीर त्यागी के मुताबिक, क्ति्रटिकल केयर में आने वाले मरीजों में से ज्यादातर की मौत इसी कारण हो रही है। वैन पर हूटर लगा बना दी एंबुलेंस : लोग पुरानी मारुति वैन को रंग रोगन कर एंबुलेंस की शक्ल दे रहे हैं। वैन पर एक ऑक्सीजन सिलेंडर रखवाकर और नीली बत्ती व हूटर लगा दिया जाता है। इमरजेंसी किट तो नाम के लिए रखी जाती है, क्योंकि गाडिय़ों को ड्राइवरों को इसके इस्तेमाल का कोई ज्ञान ही नहीं है।
पंजीकृत 320 दौड़ रहीं 2000 : आगरा आरटीओ में सरकारी और निजी अस्पतालों की मात्र 320 एंबुलेंस पंजीकृत हैं, मगर 2000 से अधिक एंबुलेंस शहर में दौड़ रही हैं। देहली गेट के अलावा हर क्षेत्र के अस्पतालों के आसपास एंबुलेंसों की मंडी लगी रहती है, ये सरकारी टैक्स की भी चोरी कर रही हैं। इन गाडि़यों की कोई जांच नहीं होती। सीएमओ कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में इसके लिए अब तक कोई भी निरीक्षण अभियान नहीं चलाया गया है। स्वास्थ्य महकमे को यह तक नहीं मालूम कि शहर में कितनी एंबुलेंस किस हॉस्पिटल से संबद्ध हैं। इस बारे में बात करने पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामरतन ने कहा, अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया जाता है कि मानक पूरी करने वाली एंबुलेंस ही इस्तेमाल करें। बाहर खड़ी होने वाली एंबुलेंसों के लिए अभी तक हमने कोई जांच नहीं की है, आपने अब बताया है तो हमें इसकी जांच जरूर करवाएंगे। वहीं, संभागीय परिवहन अधिकारी वेके सोनकिया ने कहा, बिना अस्पताल से पंजीकृत एंबुलेंस का इस्तेमाल करना गलत है।


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