Wednesday, January 26, 2011

अब सरकारी कंपनी लाएगी असली हिंदुस्तानी वियाग्रा


अब तक आपने वियाग्रा के हिंदुस्तानी संस्करण तैयार करने के कई दावे सुने होंगे, मगर ताजा पेशकश एक सरकारी कंपनी ने की है। पारंपरिक पद्धतियों की दवाएं बनाने वाली केंद्र सरकार की इकलौती कंपनी ने पूरी तरह आयुर्वेद पर आधारित ऐसी दवा बाजार में उतारने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दवा का लोगों को इसलिए भी इंतजार होगा क्योंकि इस समय ऐसे दावे करने वाली ज्यादातर दवाएं या तो कोई फायदा ही नहीं पहुंचातीं या फिर घातक रसायनों की वजह से दूसरे कई नुकसान दे जाती हैं। आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली केंद्र सरकार की इकलौती कंपनी भारतीय चिकित्सा औषधि निगम (आईएमपीसीएल) के प्रबंध निदेशक वीएएम हुसैन बताते हैं कि लोगों की खास तरह की शारीरिक अक्षमता या कमजोरी का फायदा उठा कर उन्हें ठगने वालों की एक पूरी फौज खड़ी हो गई है। इसमें खानदानी शफाखाने से लेकर बेहद आकर्षक पैकिंग वाली नकली दवाएं तक शामिल हैं। ऐसे में आईएमपीसीएल आयुर्वेदिक ग्रंथ भेषज्य रत्नावली में वर्णित और आधुनिक प्रयोगशालाओं में आजमाई गई विधि पर आधारित कामिनी विद्रावन रस नाम की दवा दो महीने के अंदर लाने जा रही है। हुसैन के मुताबिक मुख्य तौर पर केसर, जायफल, जावित्री, पीपल, लौंग और चंदन जैसे अवयवों से बने होने की वजह से इसके कुप्रभाव नगण्य हैं। भारत में बड़ी तादाद में ऐसे मरीज इस समय ज्यादातर धोखा खाने के लिए मजबूर हैं। बाजार में मौजूद ऐसी दवाओं का अध्ययन कर चुके दिल्ली औषधि विज्ञान और शोध संस्थान (डीआईपीएसआर) के निदेशक डॉ. एसएस. अग्रवाल कहते हैं कि उन्होंने 16 ऐसी दवाओं के अपने अध्ययन में पांच में सिल्डेनाफिल सिट्रेट और टेडलफिल की प्रचुर मात्रा पाई है। ये ऐसे रसायन हैं जिनका अनजाने में सेवन बेहद खतरनाक हो सकता है। प्रसिद्ध सेक्स रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुमान अग्रवाल कहते हैं कि अगर कोई सुरक्षित और प्रभावी तरीका विकसित होता है तो लोगों को फायदा मिलेगा।



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