राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की छह सदस्यीय टीम ने गुरुवार को सानंद तालुका के कोलात गांव का दौरा किया जहां घातक क्रीमियन कांगो हैमोरेजिक फीवर (सीसीएफएच) फैला हुआ है। देश में पहली बार फैली इस बीमारी से वहां अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। अतिरिक्त निदेशक (स्वास्थ्य) डा. परेश दवे ने बताया कि दल गुरुवार की सुबह यहां पहुंचा और अब कोलात में है जहां सीसीएचएफ का पहला मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि दल का प्रारंभिक उद्देश्य क्षेत्र में जांच करना है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस तरह यह विषाणु एक छोटे गांव में पहुंचा। एनसीडीसी दल का नेतृत्व संयुक्त निदेशक (महामारी विज्ञान) डा. अनिल कुमार और अतिरिक्त निदेशक (जूनोसिस) डा. वीणा मित्तल कर रहे हैं। दवे ने कहा कि वे टीके के नमूनों का संग्रह करेंगे, लोगों से बात करेंगे और जगह का निरीक्षण करेंगे। यहां से करीब 35 किलोमीटर दूर कोलात की 30 वर्षीय अमीना मोमीन सीसीएचएफ की पहली शिकार बनीं। उनका उपचार करने वाले चिकित्सकऔर नर्स भी विषाणु से पीडि़त हो गए और एक हफ्ते बाद उनकी मौत हो गई। यह पूछने पर कि क्या कोई और व्यक्ति सीसीएचएफ विषाणु से पीडि़त है तो दवे ने कहा कि इस तरह का कोई और मामला न तो कोलात में और न ही आसपास के गांवों में पता चला है। दवे ने कहा, हमने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) में जांच के लिए 58 नमूने भेजे हैं और सभी का परिणाम निगेटिव आया है। इससे पता चलता है कि सीसीएचएफ विषाणु का कोई सक्रिय संचरण नहीं है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जयनारायण व्यास ने बुधवार को कहा था कि भयभीत होने की जरूरत नहीं है क्योंकि सीसीएचएफ स्थानीय रोग है और यह महामारी प्रकृति की नहीं है।
Sunday, January 23, 2011
अहमदाबाद के पास खतरनाक बुखार की जांच शुरू
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की छह सदस्यीय टीम ने गुरुवार को सानंद तालुका के कोलात गांव का दौरा किया जहां घातक क्रीमियन कांगो हैमोरेजिक फीवर (सीसीएफएच) फैला हुआ है। देश में पहली बार फैली इस बीमारी से वहां अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। अतिरिक्त निदेशक (स्वास्थ्य) डा. परेश दवे ने बताया कि दल गुरुवार की सुबह यहां पहुंचा और अब कोलात में है जहां सीसीएचएफ का पहला मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि दल का प्रारंभिक उद्देश्य क्षेत्र में जांच करना है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस तरह यह विषाणु एक छोटे गांव में पहुंचा। एनसीडीसी दल का नेतृत्व संयुक्त निदेशक (महामारी विज्ञान) डा. अनिल कुमार और अतिरिक्त निदेशक (जूनोसिस) डा. वीणा मित्तल कर रहे हैं। दवे ने कहा कि वे टीके के नमूनों का संग्रह करेंगे, लोगों से बात करेंगे और जगह का निरीक्षण करेंगे। यहां से करीब 35 किलोमीटर दूर कोलात की 30 वर्षीय अमीना मोमीन सीसीएचएफ की पहली शिकार बनीं। उनका उपचार करने वाले चिकित्सकऔर नर्स भी विषाणु से पीडि़त हो गए और एक हफ्ते बाद उनकी मौत हो गई। यह पूछने पर कि क्या कोई और व्यक्ति सीसीएचएफ विषाणु से पीडि़त है तो दवे ने कहा कि इस तरह का कोई और मामला न तो कोलात में और न ही आसपास के गांवों में पता चला है। दवे ने कहा, हमने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) में जांच के लिए 58 नमूने भेजे हैं और सभी का परिणाम निगेटिव आया है। इससे पता चलता है कि सीसीएचएफ विषाणु का कोई सक्रिय संचरण नहीं है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जयनारायण व्यास ने बुधवार को कहा था कि भयभीत होने की जरूरत नहीं है क्योंकि सीसीएचएफ स्थानीय रोग है और यह महामारी प्रकृति की नहीं है।
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