Sunday, January 23, 2011

कैंसर विस्फोट की तरफ बढ़ रहा भारत


कैंसर मामलों के लगातार बढ़ते बोझ के कारण भारत तेजी से कैंसर विस्फोट की ओर जा रहा है। कैंसर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले 20 साल में भारत में इस जानलेवा बीमारी के मामले दोगुने या तिगुने तक पहुंच सकते हैं। तब देश में स्थिति बेहद भयावह हो सकती है। पिछले दशक में कैंसर के मामले सीधी रेखा में रहे हैं, यानी न बढ़े न घटे। कुछ तरह के कैंसर का ट्रेंड ऊपर की ओर तो अन्य का नीचे की ओर रहा। हालांकि पूर्वोत्तर में कुछ भिन्न प्रकार के कैंसर के मामले सामने आने के बाद अगले दो दशक में देश में तेजी से इसके मामले बढ़ने की आशंका जताई गई है। टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) के निदेशक डॉ. आर.ए. बादवे ने कहा कि यह गौर करने की बात है कि बढ़ते मामलों को देखते हुए कैंसर के मामले विकसित देशों के मुकाबले अब भी एक तिहाई या पांचवें हिस्से के बराबर हैं। हालांकि भारत में कैंसर के मामलों के भयावह तरह से बढ़ने की शुरुआत हो चुकी है और इसे रोकने के लिए कई कदम उठाए जाने की जरूरत है। बादवे ने यहां इंडियन न्यूक्लियर सोसायटी के 21वें वार्षिक अधिवेशन में कहा कि देश में कैंसर के करीब 50 प्रतिशत मामले धूम्रपान के कारण होते हैं जो निकट भविष्य में इसी तरह बने रह सकते हैं। टाटा मेमोरियल सेंटर से जुड़े डॉ. के.एम. मोहनदास ने कहा कि लगातार बढ़ती जनसंख्या, बढ़ती दीर्घायु, कम होता शारीरिक परीश्रम (ओबीस कैंसर) और शहरीकरण जैसे कारक कैंसर के बोझ को इतना बढ़ा सकते हैं कि 2030 तक इसके मामले तीन गुना तक पहुंच जाएंगे। डॉ. बादवे ने कहा कि बड़े स्तर पर कुछ अध्ययन किए जा रहे हैं ताकि ऐसे कैंसर के कारणों का पता लगाया जा सके। इसके अलावा, भोजन नली के कैंसर की पूर्व पहचान के लिए भी काफी बड़े स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत में 65 फीसदी कैंसर के मामले तंबाकू से संबंधित, ब्रेस्ट और सर्विकल कैंसर, होते हैं। 30 फीसदी कैंसर सिर और गर्दन में होते हैं जिनका कारण बिना धूम्रपान वाला तंबाकू है। टीएमसी निदेशक ने कहा कि ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर के बढ़ते मामलों की दर सौभाग्य से उतनी है जितनी गर्भाश्य के गिरते मामलों की दर। इस वजह से महिलाओं में कैंसर के मामले अपेक्षाकृत एक जैसे बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि गर्भाश्य का कैंसर ऐसे संक्रमण के कारण होता है जिसकी रोकथाम और पूर्व पहचान की जा सकती है।


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