अधिकांश इनेमल पेंट में सीसे की मात्रा 250 गुना तक ज्यादा
घर को रंगों से सजाना कितना खतरनाक हो सकता है, क्या इसका अंदाज है आपको? क्या आप जानते हैं कि जिस इनेमल पेंट से आप अपने घर को रंगीन कर रहे हैं वो बच्चों की सेहत को किस कदर नुकसान पहुंचाता है? इन पेंटों में मौजूद सीसे की मात्रा आपके बच्चों के विकास को बाधित कर सकती है। पेंट उद्योग पर हुए एक सर्वे के मुताबिक इनेमल पेंट के ज्यादातर ब्रांडों में सीसे की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई है। इस सर्वे के मुताबिक बहुत कम ब्रांड ऐसे हैं जो इनेमल पेंट में तय मानकों के मुताबिक सीसे का उपयोग करते हैं। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) के मुताबिक इनेमल पेंट के प्रत्येक दस लाख हिस्से में सीसे की मात्रा 1000 होनी चाहिए। इसे पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) में मापा जाता है। हालाकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इनेमल पेंट में सीसे की मात्रा 600पीपीएम ही तय की है। भारत में सीसे की मात्रा का मानक लचीला होने के बावजूद कई बड़े ब्रांड ऐसे हैं जो तय मानक से ढाई सौ गुना ज्यादा सीसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह सर्वे क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआइ) ने कराया है। यह काउंसिल उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करता है। काउंसिल के लिए यह सर्वे कंज्यूमर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने किया है। घर की सजावट बढ़ाने वाले ये इनेमल पेंट बच्चों के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं इसका खुलासा यह रिपोर्ट करती है। सर्वे में इनेमल पेंट बनाने वाली तकरीबन सभी बड़ी कंपनियों के करीब पचास ब्रांड शामिल किए गए। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इनमें से सिर्फ आधे ब्रांड ही सीसे के इस्तेमाल के बारे में बीआइएस मानकों का पालन कर रहे हैं। मानकों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों में कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं। करीब 61.3 प्रतिशत सैंपल सर्वे में ऐसे पाए गए जिनमें सीसे की मात्रा 5000 पीपीएम से अधिक है। क्यूसीआइ के महासचिव डॉ. गिरिधर जे ज्ञानी के मुताबिक इस पेंट को इस्तेमाल करने का सबसे खतरनाक पक्ष यह है कि सीसा बच्चों के विकास को बाधित करता है। खासतौर पर छह से तेरह वर्ष की आयु के बच्चों के मस्तिष्क विकास में सीसा बाधा खड़ी करता है। यही वजह है कि क्यूसीआइ ने सरकार से पेंट में सीसे के इस्तेमाल के संबंध में दिशानिर्देश जारी करने का सुझाव दिया है। पेंट में जरूरत से ज्यादा सीसे की मात्रा न सिर्फ बच्चों बल्कि गर्भवती महिलाओं के लिए भी उतनी ही खतरनाक है। डॉ. ज्ञानी के मुताबिक घरों की दीवारों पर लगे पेंट से वातावरण में सीसे के तत्व हवा में घुल जाते हैं जो अंतत: सांस के साथ बच्चों व महिलाओं के शरीर में चला जाता है।
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