बार-बार गर्भपात के दर्द से गुजरने वाली महिलाओं के लिए वैज्ञानिकों का यह नया शोध वरदान साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि सोया आधारित उपचार से गर्भधारण की संभावना छह गुना बढ़ सकती है। अपने शोध में ब्रितानी वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह उपचार न केवल गर्भधारण की संभावना को बढ़ाता है, बल्कि गर्भपात का कारण बनने वाले हानिकारक रसायनों को भी रोकता है। डेली मेल की रिपोर्ट में कहा गया है कि बार-बार आईवीएफ के बाद भी गर्भवती नहीं हो पा रहीं महिलाओं को जब परंपरागत उपचार के साथ सोया आधारित उपचार दिया गया तो उनमें से आधी सफलतापूर्वक गर्भधारण कर सकीं। वहीं सिर्फ परंपरागत उपचार लेने वाली दस महिलाओं में एक गर्भधारण कर सकी। यह खोज करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि सोयाबीन में मौजूद इंट्रालिपिड लिक्विड गर्भ को शक्ति प्रदान करता है। इसमें वसा और कैलोरी अधिक मात्रा में होती हैं। बीमार लोगों को नली के द्वारा भोजन देने में इस तत्व को प्रमुखता से दिया जाता है क्योंकि यह शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देता है। अब यह तत्व कई महिलाओं को मातृत्व सुख देगा। यह उपचार न केवल अपेक्षाकृत सस्ता, बल्कि खतरनाक रसायनों से सुरक्षा दिलाने वाला भी है। इसकी सुधरती सफलता दर बार-बार इन विट्रा फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) कराने के खर्च और इसकी असफलता के भावनात्मक दर्द को भी कम करेगी। यह तरल अंतरवसा ड्रिप के जरिए आईवीएफ इलाज से पूर्व करीब एक हफ्ते तक दी जाती है। नॉटिंघम के केयर फर्टिलिटी क्लिनिक के जॉर्ज न्यूकवे ने कहा कि यह सम्मिश्रण सस्ता, सहन योग्य और आराम से दिया जा सकने वाला है। हमने अपना सारा ध्यान उन जवाबों को ढूंढने पर लगा रखा है कि प्रकृति कब गलत जाती है। फर्टिलिटी विशेषज्ञों ने उन महिलाओं के समूह पर परीक्षण किया जो औसतन छह बार आईवीएफ इलाज करनाने के बावजूद गर्भवती नहीं हो सकीं। एक महिला 12 बार आईवीएफ तकनीक से इलाज कराने के बावजूद गर्भधारण करने में असफल रही थी। परीक्षण पूरा होने के बाद इनमें से आधी महिलाएं गर्भवती हो गई जबकि जिन महिलाओं को अंतरवसा नहीं दिया गया था उनमें सिर्फ नौ फीसदी ही गर्भधारण कर सकीं। अन्य चिकित्सक शरीर में प्राकृतिक कातिल कोशिकाओं के स्तर को कम करने के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। सोलीहुल अस्पताल की प्रोफेसर सियोभान क्वेनबाय ने बताया कि वह लगातार गर्भपात से गुजरीं महिलाओं पर किए गए परीक्षण में प्रतिरक्षी तंत्र प्रतिक्रिया पर नियंत्रण के लिए अस्थमा की दवा का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर चुके हैं।
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