Saturday, January 8, 2011

मिर्गीग्रस्त बच्चों के लिए घातक है पैरेंटल डिप्रेशन

एक नए शोध में खुलासा हुआ है किपैरेंट्स द्वारा मिर्गीग्रस्त बच्चों के प्रति अधिक चिंता रखने से उनके बच्चों के विकास में बाधा पड़ती है। इससे बच्चों केस्वास्थ्य पर निगेटिव असर पड़ता है। कनाडा के शोधकर्ताओं ने ऐसे बच्चों और उनकी माताओं के मन में उभरने वाले विचारों पर अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। उन्होंने पाया कि मिर्गी वाले बच्चों की माताओं में 30 से 38 फीसदी डिप्रेशन की भावना आने लगती हैं। माताओं का यह नकारात्मक रवैया उनके बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर तो डालता ही है, साथ ही उनके जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास भी विफल हो जाते हैं। अध्ययन के अनुसार ऐसे परिवार जिनमें बच्चे मिर्गी रोग से पीड़ित होते हैं, उनमें स्ट्रेस, डिप्रेशन और प्रतिबंध लगाने जैसी प्रवृत्ति घर करने लगती है। यह खतरा खासतौर पर माताओं पर हावी होता है क्योंकि मां ही बच्चे के सबसे नजदीक होती है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 339 माताओं को शामिल किया था, जिनके बच्चे मिर्गी जैसे रोग से ग्रस्त थे। इस शोध में उन्होंने पाया कि जब माताओं को यह मालूम चलता है कि उनका बच्चा मिर्गी से ग्रसित है तो शुरुआती दौर में 38 फीसदी माताएं अवसाद में पहुंच जाती हैं, 30 फीसदी छह माह बाद, 32 फीसदी एक वर्ष बाद और 30 फीसदी माताएं करीब दो वर्ष बाद अवसादग्रस्त होने लगती हैं, जो बच्चों के लिए अच्छी नहीं होती है। 

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