वैज्ञानिकों ने त्वचा के कैंसर की सबसे घातक बीमारी मेलानोमा के इलाज के लिए एक नई गोली बनाई है। उनका दावा है कि आरजी 7204 नाम की इस दवा के जरिए मेलानोमा से मरने वाले मरीजों की संख्या में निश्चित तौर पर कमी लाई जा सकती है। यह दवा अगले एक साल में बाजार में उपलब्ध होगी। इस दवा को बनाने वाले वैज्ञानिकों का दावा है कि यह मरीज में ट्यूमर के आकार को 80 प्रतिशत तक घटाकर उसे नष्ट कर सकती है। उन्होंने न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोअन-केटरिंग कैंसर सेंटर में मरीजों पर इस दवा का सफल परीक्षण किया। उनका कहना है कि इस दवा के साइड इफेक्ट भी न के बराबर होते हैं। संभवत: यह दवा 2012 की शुरुआत तक बाजार में होगी। उन्होंने बताया कि त्वचा कैंसर से पीडि़त मरीज के डीएनए की फुल डीकोडिंग करने के बाद मेलानोमा की दवा बनाने में सफलता मिली है। आरजी7204 दवा कैंसर के लिए जिम्मेदार बीआरएएफ जीन के विकास पर लगाम लगाती है जिससे ट्यूमर बढ़ नहीं पाता। प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. जेम्स लार्किन ने बताया कि यह बेहद रोमांचक परिणाम है। युवाओं में मेलानोमा के मामले बढ़ रहे हैं और ऐसे में प्रयोग का परिणाम उत्साहवर्द्धक है। उन्होंने कहा कि इस दवा ने बीमारी की क्रियाशीलता में नाटकीय गिरावट दिखाई है। उन्हें उम्मीद है कि यह जल्द से जल्द मरीजों के लिए उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने कहा कि एक बार जब कैंसर शरीर में फैल जाता है तो इसका इलाज करना बेहद कठिन होता है। 1970 के बाद पहली बार मेलानोमा के इलाज में इतनी बड़ी सफलता मिली है। 700 मरीजों पर किए गए परीक्षणों के अंतरिम परिणामों को अभी जारी नहीं किया गया है। मगर पूर्व की रिपोर्टो से पता चलता है कि बीमारी के अंतिम चरण में भी जिन मरीजों ने यह दवा ली उन्होंने जीवन के सात माह अतिरिक्त जिए। आगे की खोज इस साल के अंत में कैंसर कांफ्रेंस में रखी जाएगी। इस बीच, कीमोथेरेपी ले रहे मरीजों को परीक्षण के दौरान आरजी 7204 दवा से भी इलाज किया जाएगा। फिलहाल मरीजों को यह दवा तब तक उपलब्ध नहीं होगी जब तक वह अपना नाम चिकित्सकीय परीक्षण के लिए दर्ज नहीं करा लेंगे।
Sunday, January 23, 2011
एक साल दूर त्वचा कैंसर की कारगर दवा
वैज्ञानिकों ने त्वचा के कैंसर की सबसे घातक बीमारी मेलानोमा के इलाज के लिए एक नई गोली बनाई है। उनका दावा है कि आरजी 7204 नाम की इस दवा के जरिए मेलानोमा से मरने वाले मरीजों की संख्या में निश्चित तौर पर कमी लाई जा सकती है। यह दवा अगले एक साल में बाजार में उपलब्ध होगी। इस दवा को बनाने वाले वैज्ञानिकों का दावा है कि यह मरीज में ट्यूमर के आकार को 80 प्रतिशत तक घटाकर उसे नष्ट कर सकती है। उन्होंने न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोअन-केटरिंग कैंसर सेंटर में मरीजों पर इस दवा का सफल परीक्षण किया। उनका कहना है कि इस दवा के साइड इफेक्ट भी न के बराबर होते हैं। संभवत: यह दवा 2012 की शुरुआत तक बाजार में होगी। उन्होंने बताया कि त्वचा कैंसर से पीडि़त मरीज के डीएनए की फुल डीकोडिंग करने के बाद मेलानोमा की दवा बनाने में सफलता मिली है। आरजी7204 दवा कैंसर के लिए जिम्मेदार बीआरएएफ जीन के विकास पर लगाम लगाती है जिससे ट्यूमर बढ़ नहीं पाता। प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. जेम्स लार्किन ने बताया कि यह बेहद रोमांचक परिणाम है। युवाओं में मेलानोमा के मामले बढ़ रहे हैं और ऐसे में प्रयोग का परिणाम उत्साहवर्द्धक है। उन्होंने कहा कि इस दवा ने बीमारी की क्रियाशीलता में नाटकीय गिरावट दिखाई है। उन्हें उम्मीद है कि यह जल्द से जल्द मरीजों के लिए उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने कहा कि एक बार जब कैंसर शरीर में फैल जाता है तो इसका इलाज करना बेहद कठिन होता है। 1970 के बाद पहली बार मेलानोमा के इलाज में इतनी बड़ी सफलता मिली है। 700 मरीजों पर किए गए परीक्षणों के अंतरिम परिणामों को अभी जारी नहीं किया गया है। मगर पूर्व की रिपोर्टो से पता चलता है कि बीमारी के अंतिम चरण में भी जिन मरीजों ने यह दवा ली उन्होंने जीवन के सात माह अतिरिक्त जिए। आगे की खोज इस साल के अंत में कैंसर कांफ्रेंस में रखी जाएगी। इस बीच, कीमोथेरेपी ले रहे मरीजों को परीक्षण के दौरान आरजी 7204 दवा से भी इलाज किया जाएगा। फिलहाल मरीजों को यह दवा तब तक उपलब्ध नहीं होगी जब तक वह अपना नाम चिकित्सकीय परीक्षण के लिए दर्ज नहीं करा लेंगे।
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