वैज्ञानिकों ने अनुवांशिक बदलाव कर विकसित किया विशेष मुर्गा, अन्य पक्षियों में नहीं फैलेगा एच1एन1 वायरस
चिकन खाने वालों के लिए एक खुशखबरी। अब आप बिना बर्ड फ्लू से डरे कभी भी मजे से चिकन खा सकते हैं क्योंकि वैज्ञानिकों ने ऐसे चिकन का विकास किया है जिसे बर्ड फ्लू नहीं होगा और इसका नाम है सुपरचिकन। वैज्ञानिकों ने इस चिकन का विकास अनुवांशिक संवर्द्धन (जेनेटिकल मॉडिफिकेशन) के जरिए किया है और इसके विकास के बाद आशा है कि बर्ड फ्लू और इस बीमारी के कारण होने वाली मौतों पर लगाम लगाई जा सकेगी। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक सुपरचिकन का विकास करने वाले कैंब्रिज विश्वविद्यालय और एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के दल ने कहा है कि उनका यह प्रयोग घरेलू पक्षियों में होने वाले बर्ड फ्लू और उसके बाद मानवों के इससे प्रभावित होने की संभावना को रोक सकता है। हालांकि सुपरचिकन को खाद्य श्रृंखला में जोड़ने से पहले उन्होंने बहुत ज्यादा सुरक्षा जांचों की जरूरत पर बल दिया है। एवियन फ्लू लोगों के लिए बेहद गंभीर चेतावनी है। यह आसानी से मानव को संक्रमित नहीं करता है मगर जब करता है तो यह जानलेवा हो सकता है। इसके ताजे सबसे खतरनाक स्ट्रेन (किस्म) का नाम एच5एन1 है जो 2003 से अब तक 15 देशों के 300 से भी ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। साथ ही हजारों पक्षियों के मौत का कारण भी बन चुका है। पूर्वी एंगलिया में 2007 में करीब 2.6 लाख टर्कियों की मौत हो गई थी। चिकित्सकों को डर है कि यह खतरनाक वायरस कहीं खुद को ऐसी किस्म में तब्दील न कर ले जो इंसान से इंसान के बीच भी संचरित हो सकती हो। ऐसा हुआ तो हजारों लोग जान गंवा देंगे। कैंब्रिज के डॉ. लॉरेंस टिले ने कहा कि चिकन में वारयस संचरण की रोकथाम से बीमारी के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान में कमी आएगी और लोगों के संक्रमित चिकन खाने का खतरा भी घटेगा। नए प्रयोग के बारे में वैज्ञानिकों ने बताया कि चिकन के शरीर ने ऐसे अतिरिक्त जीन को स्वीकार किया जिसने उनके शरीर में फ्लू के वायरस को द्विगुणित होने से रोका। यह जीन तब प्रविष्ट कराया गया जब भू्रण अंडे की शक्ल में थे। इस जीन ने इनके पूरे शरीर की कोशिकाओं में डिकॉय आरएनए का निर्माण किया। इस डिकॉय आरएनए ने उस प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया जिससे वायरस कोशिकाओं के भीतर खुद की नकल बनाता है और पूरे शरीर में फैलता है। इसलिए अगर अनुवांशिक संविर्द्धत (जीएम) चिकन बीमार भी पड़ता है और मर जाता है तब भी यह किसी अन्य पक्षी या व्यक्ति में वायरस को नहीं पहुंचा सकता।
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