स्वाइन फ्लू के बाद अब एक नई जानलेवा बीमारी ने भारत में अपने पैर रख दिए हैं। क्रीमिया कांगो हेमरेजिक फीवर (सीसीएचएफ) नाम की इस बीमारी ने गुजरात में तीन लोगों की जान ले ली है। राष्ट्रीय विषाणु रोग संस्थान (एनआईवी), पुणे ने प्रयोगशाला और क्लीनिक जांच के जरिए इस खतरनाक बीमारी के विषाणु की पुष्टि की है। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि अस्पताल में साफ-सफाई और संक्रमण रोधी उपायों के जरिए इसे आसानी से काबू किया जा सकता है। अहमदाबाद के मरीजों के खून और पेशाब के नमूनों की आधुनिकतम लैब में जांच के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने मान लिया है कि इन मरीजों की मौत क्रीमिया कांगो बुखार के बेहद संक्रामक और जानलेवा विषाणुओं की वजह से ही हुई है। एनआईवी, पुणे की ओर से की गई पुष्टि के बाद अब केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों और विशेषज्ञों की एक टीम गुरुवार को इसकी जांच और आकलन के लिए अहमदाबाद जा रही है। इस बुखार की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसमें मरीज के शरीर से बहुत तेजी से रक्त स्त्राव शुरू हो जाता है। साथ ही इंसान में यह 20 से 40 फीसदी मामलों में जानलेवा पाया गया है। जानवरों के शरीर में चिपक कर खून पीने वाले कीड़ों (टिक) के इंसान को काटने के एक से तीन दिन के बाद मरीज में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। यह बुखार सात दिन तक रह सकता है। 75 फीसदी मामलों में बीमारी शुरू होने के तीन से पांच दिन के अंदर मरीज के शरीर से खून निकलने की भी शिकायत शुरू हो जाती है। स्वास्थ्य शोध सचिव विश्व मोहन कटोच के मुताबिक इससे घबराने की जरूरत इसलिए भी नहीं है कि इसके वायरस का हमला स्थानीय स्तर पर ही होता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा मरीज के बिल्कुल करीबी संपर्क में रहने वाले परिवार के सदस्य और उसका इलाज कर रहे डॉक्टर व अस्पताल कर्मियों को होता है। कटोच के मुताबिक यह बीमारी होने पर एंटी वायरल दवा रीबावायरिन- 4 को असरकारी पाया गया है। इसके अलावा खास कर बूचड़खानों या जानवरों का वध करने वाली जगहों पर सावधानी बरते जाने की जरूरत है।
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