Sunday, January 16, 2011

दवाओं के निर्यात के लिए अनिवार्य होगा बारकोड

देश से जाली दवाओं के निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने कमर कस ली। केंद्र सरकार ने ऐसा नुस्खा ढूंढ़ निकाला है, जिससे घरेलू फार्मास्युटिकल्स एवं दवा उद्योग की छवि सुधरेगी। विदेशों में निर्यात हो रही नकली भारतीय दवाओं पर निगरानी रखने के लिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मानदंड वाली बार कोड टेक्नोलॉजी लागू करने का फैसला किया है। इस नई तकनीक को पूरी तरह से लागू करने के लिए फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्यातकों को 30 जून, 2011 तक का समय दिया गया है। वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने निर्यात हो रही दवाओं में नकली दवाओं की निगरानी और उसका पता लगाने के लिए इसी सप्ताह अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत फार्मास्युटिकल्स उत्पादों के निर्यातकों को दवा के प्राइमरी, सेकेंडरी व तीसरे (टर्शरी) स्तर पर पैकिंग में विश्वस्तरीय बार कोड तकनीक का प्रयोग करना होगा। इसके तहत प्राइमरी स्तर पर दवा की स्टि्रप, इंजेक्शन तथा बोतल पर अनूठे उत्पाद पहचान कोड यानी जीटीआइएन, बैच नंबर, इक्सपायरी तिथि तथा क्रमानुसार नंबर के साथ 2डी ग्लोबल स्टैंडर्ड बार कोड तकनीक अख्तियार की जाएगी।

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