Thursday, January 6, 2011

कैंसर दवाओं के साइड इफेक्ट रोकेगा ग्लूकोज

देश के रक्षा वैज्ञानिकों ने खोजा चमत्कारिक ड्रग-2 नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत ने दुनियाभर के कैंसर रोगियों को नए साल का तोहफा देते हुए ऐसा चमत्कारिक ड्रग-2 (डिऑक्सी डी ग्लूकोज) विकसित किया है, जो उन्हें इलाज के दौरान होने वाले बहुत से साइड इफेक्ट्स से निजात दिलाएगी। दिलचस्प बात यह है कि यह ड्रग देश के रक्षा वैज्ञानिकों ने तैयार की है। इंस्टीट्यूट आफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसिज इनमास के डाक्टरों ने एक ऐसा डिऑक्सी डी ग्लूकोज विकसित करने में कामयाबी हासिल की है जो कैंसर युक्त कोशिकाओं में घुसकर बाकी सामान्य कोशिकाओं की रक्षा करेगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के चीफ कंट्रोलर और लाइफ साइंसिज के प्रभारी डब्ल्यू सेल्वामूर्ति ने इस चमत्कारिक ड्रग-2 के बारे में बताया कि दुनिया में यह अपनी तरह की पहली औषधि होगी, जो कैंसर के लिए होने वाली रेडियोथेरेपी से पहली दी जाया करेगी। उन्होंने बताया कि इस दवा को लेने से कैंसर वाली कोशिकाओं को आसानी से तथा अधिक कारगर ढंग से खत्म किया जा सकेगा। रेडियोर्धमी विकरण से भी मरीज को कम से कम समय तक गुजरना होगा, जिसका नतीजा यह होगा कि कीमोथेरेपी के बाद उल्टियां, चक्कर आना, बाल- झडना, भूख न लगना तथा बेहद थकान होने जैसे दिक्कतें 90 प्रतिशत तक कम हो जाएंगी। दरअसल, शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कीमो थैरेपी तथा रेडियो थैरेपी दी जाती है। इसमें गामा किरणों का इस्तेमाल होता है। इनके दुष्परिणाम इतने कष्टकर होते हैं कि साइड इफैक्ट्स जानने के बाद कई कैंसर रोगी तो तौबा ही कर लेते हैं। औषध महानियंत्रक (डीसीजीआई) तथा भारतीय चिकित्सा अनुंसधान परिषद (आईसीएमआर) ने इस चमत्कारिक दवा को हरी झंडी दे दी है। इसे अब स्वीकृति के लिए आईसीएमआर की नवीन औषधि जांच समिति के समक्ष रख दिया गया है। व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए इसे हैदराबाद स्थित डॉक्टर रेड्डीज लेबोरेटरी (डीआरएल) को दे दिए गए हैं। उन्होने आशा व्यक्त की कि अगले दो तीन महीनों में यह आम जनता के लिए उपलब्ध हो सकेगा।
ग्लूकोज की खासियत
इस ग्लूकोज की खासियत यह है कि ये सामान्य ग्लूकोज की तरह रक्त में घुस तो जाता है, लेकिन सामान्य ग्लूकोज की तरह उन्हें उर्जा प्रदान नहीं करता। इसके कारण कोशिकाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसलिए उन्हें नष्ट करने के लिए बहुत ही कम मात्रा में रेडियोथैरेपी की जरूरत होगी और रोगी को कीमो और रेडियोथैरेपी से होने वाले साइड इफैक्टस भी उसी हिसाब से कम हो जाएंगे।

No comments:

Post a Comment