Sunday, January 30, 2011

आगरा में संक्रमण फैला रहे 500 से अधिक अस्पताल


जगह-जगह कुकुरमुत्तों की तरह खुले अस्पताल। न उपकरण और न हुनरमंद हाथ। फिर भी जिंदगी मौत से जूझते मरीजों के इलाज की गारंटी। इलाज के यही अड्डे अस्पताली कचरे को जहां-तहां और ऐसे-वैसे फेंक बीमारी की वारंटी दे रहे हैं। आरटीआइ के तहत मांगी गई जानकारी में नगर निगम ने खुद यह स्वीकारा है। ज्ञानेंद्र मिश्रा ने शहर के अस्पतालों, नर्सिग होम और पैथोलॉजी लैब द्वारा जैव चिकित्सीय अपशिष्ट निस्तारण के संबंध में सात बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी एवं जैव अपशिष्ट नोडल प्रभारी पीके सिंह ने 11 जनवरी 2011 को वर्ष 2010 में पंजीकृत हुए 85 अस्पताल, नर्सिग होम और पैथोलॉजी की सूची दी, जबकि शहर में 594 अस्पताल हैं। दावा है कि कुछ अस्पतालों को छोड़कर सभी से जैव अपशिष्ट निस्तारण के नियमों का पालन किया जा रहा है। नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण कर अनुपालन न होने की स्थिति में संस्था प्रमुख को नोटिस भेजते हैं। आरटीआइ के पीछे का सच : बीते वर्ष 28 अक्टूबर को नगर निगम में बैठक के लिए पशु चिकित्साधिकारी द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार शहर में कुल निजी अस्पताल, नर्सिग होम, पैथौलॉजी सेंटर, एक्स-रे क्लीनिक, डेंटल क्लीनिक, प्राइवेट क्लीनिक की संख्या 597 हैं। जिसमें वर्ष 2009 में कुल 69 संस्थाओं एवं वर्ष 2010 में 75 संस्थाओं ने पंजीकरण कराया। अधिकांश अस्पतालों द्वारा जैव अपशिष्ट निस्तारण नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।


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